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छूटी रफ्तार दोबारा लौटाई: किदांबी श्रीकांत ने मलेशिया मास्टर्स में दिखाया असली दम

किदांबी श्रीकांत की वापसी: एक प्रेरणादायक कहानी-छह साल बाद, किदांबी श्रीकांत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लगन और मेहनत से हर मुश्किल पार की जा सकती है। मलेशिया मास्टर्स के फाइनल में पहुँचकर उन्होंने न सिर्फ़ अपनी वापसी की घोषणा की, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल भी कायम की।

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मलेशिया में चमकी पुरानी चमक-काफ़ी समय से ख़राब फॉर्म से जूझ रहे श्रीकांत ने मलेशिया मास्टर्स में शानदार प्रदर्शन किया। भले ही उन्होंने ख़िताब नहीं जीता, लेकिन छह साल बाद किसी वर्ल्ड टूर फाइनल में पहुँचना उनकी लगन और ज़िद का प्रमाण है। ये वापसी साबित करती है कि हार नहीं मानने वालों की कभी हार नहीं होती।

 कोच का विश्वास: श्रीकांत हैं टॉप खिलाड़ी-श्रीकांत के कोच, आरएमवी गुरु साईदत्त का मानना है कि श्रीकांत का असली स्थान टॉप खिलाड़ियों के बीच है। उनका लक्ष्य है कि श्रीकांत जल्द ही टॉप 20 में वापसी करें और बड़े टूर्नामेंट्स में लगातार अच्छा प्रदर्शन करें। कोच के अनुसार, श्रीकांत की खेलने की तकनीक हमेशा से ही बेहतरीन रही है, बस थोड़ी कमी रही है निरंतरता की।

 शरीर से हुई लंबी जंग-श्रीकांत की सबसे बड़ी चुनौती उनके शरीर की चोटें थीं। कंधे, घुटने, एड़ियाँ और अंदरूनी मांसपेशियों में चोटों के कारण वो ठीक से अभ्यास भी नहीं कर पा रहे थे। कई बार तो उन्हें सिर्फ़ हल्के अभ्यास और शैडो प्रैक्टिस तक सीमित रहना पड़ा। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

कोच का संदेश: पहले फिटनेस-2023 के अंत में, कोच पारुपल्ली कश्यप ने श्रीकांत को साफ़ कह दिया था कि अगर उन्हें वापसी करनी है तो सबसे पहले उन्हें अपनी फिटनेस पर ध्यान देना होगा। उस समय श्रीकांत की हालत काफी ख़राब थी, लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत की। थकान और मूड चाहे जो भी हो, वो हर दिन सुबह-शाम ट्रेनिंग और जिम में मौजूद रहते थे।

 थकान में दिखाया कमाल-तीन लगातार टूर्नामेंट खेलने के बाद, जब शरीर सबसे ज़्यादा थका हुआ होता है, श्रीकांत ने मलेशिया में जो प्रदर्शन किया, वो उनकी फिटनेस और अनुशासन का प्रमाण है। कोच का कहना है कि ये बदलाव उनके मानसिक संतुलन और कड़ी मेहनत का नतीजा है।

बदला गेम प्लान, बदली सोच-पहले श्रीकांत का खेल बहुत तेज़ और आक्रामक होता था। वो रैलियाँ जल्दी ख़त्म करने की कोशिश करते थे, जिससे वो खुद दबाव में आ जाते थे। लेकिन अब वो एक योजना के साथ खेलते हैं – रैली बनाते हैं, गति को नियंत्रित करते हैं और फिर सही समय पर आक्रमण करते हैं। ये नया अंदाज़ विरोधी खिलाड़ियों को उलझा देता है।

 अनुशासन और संयम: सफलता का मंत्र-श्रीकांत और एचएस प्रणॉय जैसे सीनियर खिलाड़ी युवा खिलाड़ियों को दिखा रहे हैं कि केवल प्रतिभा ही नहीं, अनुशासन और मानसिक मज़बूती भी ज़रूरी है। भले ही परिणाम में देरी हो, लेकिन दृढ़ रहना ही सफलता का रास्ता है।

युवाओं के लिए प्रेरणा-जो युवा खिलाड़ी पहले श्रीकांत को हराकर खुश हो रहे थे, अब वे देख रहे हैं कि श्रीकांत 500 लेवल के फाइनल में खेल रहे हैं और बड़े नामों को हरा रहे हैं। इससे युवाओं को यह एहसास हो रहा है कि अगर श्रीकांत वापस आ सकते हैं, तो वे भी खुद पर भरोसा करके आगे बढ़ सकते हैं।

 अगला लक्ष्य: रैंकिंग में सुधार-अब श्रीकांत की टीम का ध्यान उनकी रैंकिंग में सुधार पर है। अमेरिका और कनाडा में होने वाले सुपर 300 टूर्नामेंट्स में उनका नाम दर्ज है। उनका धीरे-धीरे 500, 750 और 1000 लेवल के टूर्नामेंट्स में खेलने का लक्ष्य है। इसके लिए फिटनेस पर लगातार ध्यान देना होगा।

 कश्यप का मानना: श्रीकांत अभी भी टॉप 10 में हैं-पारुपल्ली कश्यप का मानना है कि श्रीकांत जैसे प्रतिभावान खिलाड़ी 35-36 साल की उम्र तक आसानी से खेल सकते हैं। उन्होंने कहा कि मलेशिया में श्रीकांत ने जो खेल दिखाया, वो टॉप 10 के खिलाड़ी जैसा ही था।

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