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विरासत से प्रेम हर किसी को नहीं होता

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किसी देश समाज,जनजाति की विरासत काे सहेजने की बात को बहुत से लोग करते हैं लेकिन अपनी विरासत पर गौरव करने वाला ही देश,समाज व जनजाति की विरासत को सहेज पाता है, महापुरुषों का याद कर पाता है, उन्हें देश में वह सम्मानजनक स्थान दिलाता जिसके वह हकदार होते हैं।पीएम मोदी ऐसे ही नेता हैं,उन्होंने सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा बनवाकर उनको ऐसा सम्मान दिया जैसा सम्मान देने को तो बहुत से लोग सोच तक नहीं सकते थे। देश के इतिहास में सरदार पटेल को जो सम्मान मिलना चाहिए था, कांग्रेस सरकार के रहते नहीं मिला। वह एक तरह से देश की मुख्य धारा से गायब कर दिए गए थे।पीएम मोदी ने सरदार पटेल की सबसे ऊंची प्रतिमा बनवाकर विरासत के प्रति जो सम्मान प्रकट किया है, वह सराहनीय है, विरासत के प्रति ऐसा सम्मान इस देश के नेताओं मेें देखन को नहीं मिलता है।

चाहे काशी विश्वनाथ हो,चाहे उज्जैन का महाकाल लोक हो और भी कई राज्यों में मोदी ने अपनी विरासत पर गौरव करने वाले काम किए है। यह काम वह किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं करते हैं, देश की विरासत पर उनको गौरव है, वह चाहते हैं विरासत का गौरव बना रहना चाहिए। किसी महापुुरुष ने किसी कालखंड में किसी क्षेत्र, राज्य में जनहित में काम किए हैं, तो उनके काम को याद करने की जरूरत होती है ताकि समाज अपने गौरवशाली अतीत व इतिहास के भूल न जाए, ताकि समाज अपने महापुरुषों को भूल न जाए। यह समाज का काम होता है, समाज के लोगों का काम होता है, देश के नेताओं का काम होता है कि वह महापुरुषों की स्मृति को स्थायी बनाने के लिए क्या करते हैं।

कुछ लोग कहीं पर प्रतिमा लगवा देते हैं, कुछ लोग किसी मार्ग का नाम उनके नाम पर रख देते हैं। कहीं पर सरकारी संस्थाओं के नाम महापुरुषों के नाम पर रख दिए जाते हैं।सबसे अच्छा तरीका होता है कि महापुुरुष के नाम पर दिवस की शुरुआत की जाती है।पीएम मोदी ने यही किया। जनजातीय महानायक बिरसामुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के मनाने के रूप में 2021 में शुरआत की। ऐसा करके मोदी ने बिरसा मुंडा को देश की मुख्यधारा में वह स्थान दिलाया जिसके वह हकदार थे और उनको बरसों से वंचित करके रखा गया था। मोदी का यह प्रयास जनजाति सहित देश के लोगों को उस गौरव का एहसास कराना था जिससे लोग अब तक वंचित थे।

आज जनजातीय समाज 15 नवंबर को हमारी विरासत-हमारा गौरव कह कर फूला नहीं समा रहा है। मोदी ने यह किसी राजनीति के लिए नहीं किया है,वह विरासत पर गौरव करते हैं, इसलिए ऐसा स्वाभाविक रूप से करते हैं। वहीं राहुल गांधी को बीस साल हो गए राजनीति में कभी हमारी विरासत-हमारा गौरव की बात तक नहीं की है।अभी झारखंड में चुनाव है और झारखंड का स्थापना दिवस भी 15 नवंबर है तो वह कहने को मजबूर है कि उनका गठबंधन झारखंड के लोगों की संस्कृति व अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबध्द है।

15 नवंबर को देश में बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय दिवस के रूप में २१ से मनाया जा रहा है, देश में शायद ही किसी को याद हो कि राहुल गांधी या कांग्रेस अध्यश्र खरगे ने बिरसा मुंडा को याद किया हो। उनको नमन किया हो।आदिवासी बहुल राज्य में किसी भी पार्टी की सरकार हो महापुरुषों की जयंती पर शानदार कार्यक्रम होने चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है, अभी राज्य में भाजपा की सरकार है तो राज्य में 15 नवंबर को भव्य व शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जशपुर में पदयात्रा निकाली गई।

इस तरह के आयोजन से जनजातीय समाज अपने अतीत,विरासत से जुड़ा रहता है।इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए। साय ने जनजातीय गौरव दिवस पर शानदार कार्यक्रमों का आयोजन कर साबित कर दिया वह खांटी आदिवासी है, उन्होंने जो कुछ किया जनजातीय गौरव को बनाए रखने के लिए। विश्व आदिवासी दिवस पर ऐसे आयोजन तो भूपेश सरकार ने किए हैं लेकिन वह राजनीति के लिए किया करते थे।क्योंकि वह समाज के नहीं थे, वह आदिवासी नहीं थे। वह आदिवासियों को खुश करके उनका वोट लेना चाहते थे,एकबार सफल रहे लेकिन पांच साल में आदिवासियों ने उनको नकार दिया क्योंकि उनका आदिवासी प्रेम नकली था।उनको आदिवासी से मोहब्बत होती तो जनजातीय गौरव दिवस उसी तरह मनाते जैसे सीएम ने मनाया है।

राम प्रसाद दुबे

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