मध्यप्रदेश

सतना-मैहर में बढ़ी एचआईवी संक्रमितों की संख्या, दो माह में मिले 21 नए मरीज; चार वर्षीय मासूम भी संक्रमित

सतना। मध्य प्रदेश के सतना और मैहर जिले में एचआईवी संक्रमण के नए मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दो महीनों के दौरान दोनों जिलों में एचआईवी के 21 नए मरीज चिन्हित किए गए हैं। इनमें एक चार वर्षीय मासूम भी शामिल है, जिसे संक्रमण जन्म के दौरान अपनी मां से मिला है। सभी संक्रमितों को उपचार के लिए एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) कार्यक्रम से जोड़ दिया गया है।

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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, नए मामलों में से 15 मरीज जिला अस्पताल स्थित इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आईसीटीसी) में जांच के दौरान सामने आए हैं। शेष मरीज मैहर, अमरपाटन, नागौद और मझगवां के जांच केंद्रों में चिन्हित किए गए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है और अब उन्हें उपचार के लिए रीवा जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

राहत की बात यह है कि हाल के दो महीनों में किसी गर्भवती महिला में एचआईवी संक्रमण का नया मामला सामने नहीं आया है, हालांकि, मई माह में मैहर जिले की एक एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिला का जिला अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराया गया। चिकित्सकों ने निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मां और नवजात दोनों की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिला अस्पताल समेत मैहर, अमरपाटन, नागौद और मझगवां के सरकारी अस्पतालों में संचालित आईसीटीसी केंद्रों पर प्रतिदिन लगभग 200 लोग एचआईवी जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या गर्भवती महिलाओं की होती है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान एचआईवी जांच अनिवार्य की गई है। अकेले जिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 से अधिक लोगों की जांच की जा रही है।

विभागीय रिकॉर्ड बताते हैं कि वर्ष 2025-26 के दौरान सतना और मैहर जिले में एचआईवी संक्रमण के 169 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं वर्ष 2002 में एआरटी सेंटर की स्थापना के बाद से अब तक 1,200 से अधिक एचआईवी संक्रमित मरीज चिन्हित हो चुके हैं। इनमें 85 से अधिक गर्भवती महिलाएं भी शामिल रही हैं।

जिला अस्पताल में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव की विशेष व्यवस्था उपलब्ध है। अब तक 30 से अधिक संक्रमित महिलाओं का सफल प्रसव कराया जा चुका है। चिकित्सकों का दावा है कि समय पर उपचार और निगरानी के कारण कई मामलों में नवजात बच्चों को संक्रमण से सुरक्षित रखा गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, जागरूकता और नियमित उपचार से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार की आशंका होने पर जांच कराने और चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

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