
ड्रीम इलेवन और बीसीसीआई की पार्टनरशिप का अंत: क्या है पूरा मामला?-भारत में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक ऐसा जुनून है जो करोड़ों लोगों के दिलों में बसता है। लोग सिर्फ मैच देखने का ही आनंद नहीं लेते, बल्कि फैंटेसी लीग्स में अपनी टीम बनाकर और पैसा लगाकर खेल का एक अलग ही रोमांच अनुभव करते हैं। लेकिन, हाल ही में आए नए ऑनलाइन गेमिंग कानूनों ने इस पूरी तस्वीर को ही बदल दिया है। इस नए नियम का सबसे बड़ा असर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और उससे जुड़े बड़े ब्रांड्स पर पड़ा है। ड्रीम इलेवन, जो अब तक भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी का आधिकारिक स्पॉन्सर था, उसका बीसीसीआई के साथ सफर यहीं थम गया है। यह साझेदारी अगले साल तक जारी रहनी थी, लेकिन नए कानून के लागू होने से यह बीच में ही समाप्त हो गई। अब ऐसी संभावना है कि एशिया कप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भी टीम इंडिया अपनी जर्सी पर किसी स्पॉन्सर के बिना उतरेगी, जो क्रिकेट जगत में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। यह स्पष्ट है कि ऑनलाइन गेमिंग क्षेत्र और क्रिकेट के बीच की यह साझेदारी नए नियमों के कारण सीधे तौर पर प्रभावित हुई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!माय11सर्कल का करोड़ों का डील भी अधर में लटका-ड्रीम इलेवन के बाद, अब माय11सर्कल का बीसीसीआई के साथ करोड़ों का करार भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। इस कंपनी ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए बीसीसीआई के साथ पूरे पांच साल का एक बड़ा अनुबंध किया था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 625 करोड़ रुपये थी। इसका मतलब है कि हर साल कंपनी बीसीसीआई को 125 करोड़ रुपये का भुगतान कर रही थी। लेकिन, जब से ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगी है, तब से इस तरह की पार्टनरशिप का आगे बढ़ना काफी मुश्किल हो गया है। माय11सर्कल ने खुद एक बयान जारी करके यह स्पष्ट कर दिया है कि नए कानून के लागू होने के साथ ही वे अपने सभी “रियल मनी गेमिंग” ऑपरेशन्स को तत्काल प्रभाव से बंद कर रहे हैं। कंपनी ने अपने ग्राहकों को यह भरोसा दिलाया है कि वे अपने वॉलेट में मौजूद सभी पैसों को आसानी से निकाल सकेंगे और इस प्रक्रिया को पूरी तरह से सरल रखा जाएगा। हालांकि, अब से किसी भी प्रकार का नया कैश डिपॉजिट स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे यह बात पक्की हो गई है कि भविष्य में क्रिकेट को इन ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों से मिलने वाला वित्तीय सहारा अब नहीं मिल पाएगा। बीसीसीआई को अब नए स्पॉन्सर्स की तलाश में जुटना होगा, जो निश्चित रूप से एक बड़ी चुनौती होगी।

