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भारत में तेजी से बढ़ रहा ओरल कैंसर: कारण और शुरुआती लक्षण जानना क्यों है जरूरी?

 मुंह का कैंसर: क्यों बढ़ रहे हैं मामले और कैसे पहचानें शुरुआती लक्षण?

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 भारत में चिंताजनक स्थिति: मुंह का कैंसर क्यों बन रहा है पुरुषों के लिए बड़ी समस्या?-दोस्तों, आजकल हमारे देश में कैंसर के मामले जिस तरह से बढ़ रहे हैं, वो वाकई चिंता का विषय है। और जब बात पुरुषों में होने वाले कैंसर की आती है, तो ‘ओरल कैंसर’ यानी मुंह का कैंसर एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। अक्सर हम मुंह में होने वाले छोटे-मोटे छालों या घावों को मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। हमें लगता है कि ये तो आम बात है, अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि यही छोटी सी लापरवाही आगे चलकर बहुत भारी पड़ सकती है। अगर इस पर समय रहते ध्यान न दिया जाए और इलाज शुरू न हो, तो यह धीरे-धीरे गले तक फैल सकता है और जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसीलिए, यह बहुत ज़रूरी है कि हम इसकी शुरुआती पहचान करना सीखें। अगर इसे बिल्कुल शुरुआती दौर में ही पकड़ लिया जाए, तो इसका इलाज बहुत आसान हो जाता है और मरीज के ठीक होने की उम्मीदें कई गुना बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि हमें इसके होने के कारणों और इसके शुरुआती लक्षणों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। इससे न केवल हम खुद को इस बीमारी से बचा सकते हैं, बल्कि अपने प्रियजनों को भी समय रहते सतर्क कर सकते हैं।

 ओरल कैंसर के पीछे के असली कारण: क्या आप इन आदतों के शिकार हैं?-ओरल कैंसर के पीछे का सबसे बड़ा और मुख्य कारण है ‘तंबाकू’ का सेवन। चाहे वह गुटखा हो, खैनी हो, पान मसाला हो, या फिर बीड़ी और सिगरेट, ये सभी चीजें सीधे हमारे मुंह के नाजुक टिश्यूज के संपर्क में आती हैं और धीरे-धीरे कैंसर को दावत देती हैं। इसीलिए डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को इन जानलेवा चीजों से दूर रहने की सलाह देते हैं। इसके अलावा, शराब का सेवन भी एक बहुत बड़ा रिस्क फैक्टर है। और अगर कोई व्यक्ति तंबाकू और शराब दोनों का सेवन करता है, तो उसके लिए ओरल कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। पान और सुपारी का सेवन भी नुकसानदायक है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ घोषित किया है। यह सिर्फ़ तंबाकू और शराब ही नहीं है, बल्कि दांतों की ठीक से सफाई न करना, मसूड़ों की बीमारियाँ होना या फिर लंबे समय तक खराब फिटिंग वाले नकली दांतों का इस्तेमाल करना भी मुंह के कैंसर का कारण बन सकता है। कुछ खास मामलों में, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का संक्रमण भी ओरल कैंसर को जन्म दे सकता है। अच्छी बात यह है कि अगर इस बीमारी को इसके शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाए, तो इसका सफल इलाज संभव है और व्यक्ति एक स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकता है।

 इन लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़: क्या आपके मुंह में भी दिख रहे हैं ये संकेत?-ओरल कैंसर की पहचान करने का सबसे प्रभावी तरीका है इसके शुरुआती लक्षणों को समझना और उन पर ध्यान देना। अगर आपके मुंह के अंदर, जीभ पर, या गालों के अंदर कोई ऐसा घाव या छाला है जो दो हफ्तों से ज़्यादा समय से ठीक नहीं हो रहा है, तो यह एक गंभीर संकेत हो सकता है। सामान्य छाले या घाव आमतौर पर एक या दो हफ़्ते में ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर कोई घाव लगातार बना रहता है, तो उसे बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इसी तरह, मुंह के अंदर सफेद या लाल रंग के धब्बे या चकत्ते दिखाई देना भी खतरनाक हो सकता है, जिन पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। अगर आपको अचानक कुछ भी निगलने या चबाने में परेशानी हो रही है, जबड़े को हिलाने-डुलाने में दिक्कत आ रही है, या गले में कुछ फंसा हुआ महसूस हो रहा है, तो ये भी ओरल कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा, बिना किसी चोट के मुंह से खून आना, मुंह के किसी हिस्से में सुन्नपन महसूस होना, आपकी आवाज़ में बदलाव आना, या फिर गर्दन में किसी गांठ का उभरना भी ओरल कैंसर के संकेत हो सकते हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो बिना देर किए तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और अपनी जांच करवानी चाहिए।

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