
होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह आईआरजीसी के नियंत्रण में : ईरान
तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह उसके नौसैनिक नियंत्रण में है। आईआरजीसी ने इस क्षेत्र में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन अभियानों की एक श्रृंखला का भी विवरण दिया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार समिति तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक आईआरजीसी ने बुधवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति निर्णायक रूप से और पूरी तरह उसके नौसैनिक बलों के नियंत्रण में है।
आईआरजीसी ने कहा कि उसके नौसैनिक बलों ने 01 अप्रैल की सुबह से ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ की 89वीं लहर के हिस्से के रूप में पांच बड़े अभियान चलाए। इन अभियानों में अमेरिकी और इजराइली बलों के प्रमुख सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन के संयोजन का इस्तेमाल किया गया।
इसमें आगे कहा गया कि पहले हमले में अमेरिकी बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले और संयुक्त अरब अमीरात के जलक्षेत्र तथा द्वीपों में स्थित एक समुद्री संरचना पर तैनात दो ‘अर्ली-वॉर्निंग एयर डिफेंस रडार सिस्टम’ को नष्ट कर दिया गया।
बयान में कहा गया कि इसराइल से संबंधित एक तेल टैंकर एक्वा वन को मध्य फारस की खाड़ी में निशाना बनाया गया। मिसाइल हमले के बाद इस टैंकर में आग लगने की सूचना मिली थी।
आईआरजीसी के अनुसार, बहरीन में अमेरिकी पांचवें बेड़े की परिधि के बाहर स्थित अमेरिकी बलों के गुप्त जमावड़ा स्थल पर बड़ी संख्या में हमलावर ड्रोनों और कई बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। हमले के बाद कई वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों को मनामा के अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया। इसके अलावा, अल-उदेरी अड्डा स्थित एक चिनूक हेलीकॉप्टर तैयारी केंद्र और उपकरणों के भंडारण वाले हैंगरों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से निशाना बनाया गया।
आईआरजीसी ने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसकी नौसेना के पूरी तरह से नियंत्रण में है और दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति के नाटकीय हावभाव के चलते इस जलमार्ग को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका व इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वाेच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों की माैत हाे गई थी। इसके जवाब में ईरान ने कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशाें में मौजूद अमेरिकी और इज़राइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया।
