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ट्रंप के टैरिफ से भारत-अमेरिका रिश्ते में दरार? जानें पूरी खबर

अमेरिका का टैरिफ झटका: क्या ट्रम्प ने भारत की पोल खोली?- यह लेख अमेरिका द्वारा भारत पर अचानक 25% का टैरिफ लगाने के फैसले और इसके भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ने वाले प्रभावों पर केंद्रित है।

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 टैरिफ का झटका: एक नया अध्याय-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस फैसले से भारत में हड़कंप मच गया है। दशकों से चले आ रहे भारत-अमेरिका के मधुर संबंधों पर एकाएक संकट के बादल छा गए हैं। 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद से भारत ने अमेरिका के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए हैं, लेकिन ट्रम्प का यह कदम उस संतुलन को बिगाड़ सकता है जिसे भारत ने बड़ी सावधानी से बनाया है। यह फैसला न केवल व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित करेगा, बल्कि दोनों देशों के भविष्य के सहयोग पर भी गहरा असर डाल सकता है। भारत ने हमेशा से ही अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों को महत्व दिया है, लेकिन यह फैसला इस रिश्ते की गहराई को परखने वाला है।

‘भारत फर्स्ट’ का संदेश-आज का भारत पहले जैसा नहीं रहा जो अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुक जाए। हाल के वर्षों में भारत ने अपनी आर्थिक और राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने अमेरिका के साथ ईमानदारी से बातचीत की, लेकिन अपनी सीमाओं का ध्यान रखा। जबकि कई देशों ने अमेरिका को तेल, कृषि और रक्षा क्षेत्र में रियायतें दीं, भारत ने अपने 70 करोड़ किसानों के हितों से समझौता नहीं किया। ट्रम्प का यह टैरिफ एक गलत धारणा को बढ़ावा देने की कोशिश है कि भारत व्यापार में कठोर है या रूस से तेल खरीदकर अमेरिका को चुनौती दे रहा है। सच्चाई यह है कि भारत के टैक्स नियम WTO के अनुसार हैं और रूसी तेल ने भारत में महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद की है। भारत अपनी आर्थिक नीतियों में स्वतंत्रता चाहता है और यह ‘भारत फर्स्ट’ नीति का ही परिणाम है।

राजनीतिक चुनौती: एकजुट जवाब?-ट्रम्प के इस फैसले ने भारत की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। पिछले अनुभवों से सीखते हुए, भारत ने हमेशा अमेरिका-विरोधी बयानबाजी से परहेज किया है। लेकिन अब सवाल उठता है कि क्या यह रणनीति अब भी कारगर है? सरकार का कहना है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। भारत और अमेरिका के बीच निष्पक्ष, संतुलित और परस्पर लाभदायक समझौते की कोशिश जारी रहेगी, लेकिन दबाव में नहीं। यह समय है जब ‘भारत फर्स्ट’ नीति को बिना किसी झिझक के आगे बढ़ाया जाए और दुनिया को भारत की ताकत का एहसास कराया जाए। यह एक कठिन समय है, लेकिन भारत एकजुट होकर इस चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

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