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फंड जुटाने की तैयारी में वेदांता, ज़ाम्बिया कॉपर कारोबार को अमेरिका में लिस्ट करने पर विचार

वेदांता: माइनिंग सेक्टर की बड़ी कंपनी वेदांता रिसोर्सेज फंड जुटाने के लिए कई विकल्पों पर काम कर रही है। कंपनी अपने ज़ाम्बिया वाले तांबा कारोबार ‘कोंकोला कॉपर माइंस’ को अमेरिका में लिस्ट कराने पर भी विचार कर रही है, ताकि माइनिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए ज़रूरी पैसा जुटाया जा सके। यह जानकारी कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। वेदांता की कोंकोला कॉपर माइंस में करीब 1.6 करोड़ टन तांबे का भंडार और संसाधन है। कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) अजय गोयल ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में बताया, “ज़ाम्बिया की यह माइन यानी कोंकोला कॉपर माइंस, तांबे के सबसे उच्च ग्रेड्स में से एक है। ऐसे में फंड जुटाने के कई रास्ते हमारे सामने हैं। वैल्यू बढ़ाने के मकसद से आने वाले वक्त में इसे शेयर बाजार में लिस्ट करना भी एक अहम विकल्प हो सकता है।” उन्होंने कहा कि मौजूदा तांबे की कीमतों को देखकर कहा जा सकता है कि यह माइन असल में ‘सोने की खान’ जैसी साबित हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल कोई फैसला पक्का नहीं हुआ है, लेकिन हां, लिस्टिंग को लेकर विचार ज़रूर चल रहा है। जब उनसे यह पूछा गया कि लिस्टिंग के ज़रिए कितनी रकम जुटाई जाएगी और उसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा, तो उन्होंने कहा, “इस समय तक हम उस स्टेज तक नहीं पहुंचे हैं कि कोंकोला कॉपर माइंस (KCM) की वैल्यू तय कर सकें या कितनी फंडिंग होगी, ये कह सकें। अभी हमारा पूरा ध्यान इस ज़ाम्बिया वाले प्रोजेक्ट को पूरी तरह से ऑपरेशनल बनाने और इसकी क्षमता को 300 केटीपीए (हज़ार टन प्रति साल) तक बढ़ाने पर है। उसके बाद सही समय आने पर लिस्टिंग पर फैसला लिया जा सकता है।”

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आपको बता दें कि तांबा इन दिनों दुनिया भर में काफी अहमियत रखता है, खासकर एनर्जी ट्रांजिशन टेक्नोलॉजीज़ जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल और डिजिटल सिस्टम्स में इसकी खपत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तांबे की डिमांड दुनियाभर में काफी तेज़ी से बढ़ रही है। कोंकोला माइंस में 2.4% से ज्यादा हाई-ग्रेड तांबा मौजूद है, जो दुनिया के सबसे बड़े हाई-ग्रेड कॉपर डिपॉज़िट्स में से एक माना जाता है। यही नहीं, यहां पर 4,12,000 टन कोबाल्ट का भी भंडार है, जो इसे दुनिया के टॉप 5 कोबाल्ट उत्पादकों में शामिल कर सकता है। वेदांता की योजना है कि KCM में कॉपर का प्रोडक्शन सालाना 2 लाख टन से बढ़ाकर 3 लाख टन किया जाए और कोबाल्ट का प्रोडक्शन भी 1,000 टन से बढ़ाकर 6,000 टन सालाना किया जाए। इसके लिए कंपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने पर काम कर रही है। बता दें कि वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड, वेदांता लिमिटेड और कोंकोला कॉपर माइंस की होल्डिंग कंपनी है। इनके तहत कई सब्सिडियरी कंपनियां काम करती हैं, जिनका कारोबार तेल और गैस, जिंक, लेड, सिल्वर, तांबा, आयरन ओवर, स्टील, निकेल, एल्युमिनियम, पावर और ग्लास सब्सट्रेट जैसे सेक्टर्स में फैला हुआ है।

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