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Rafale Deal: राफेल से चार गुना बड़ी डील, पाकिस्तान के यार ने आखिर ऐसा क्यों किया, क्या है मजबूरी?
Rafale Deal: पिछले दिनों भारत के रक्षा मंत्रालय के रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी. उम्मीद की जा रही है कि इस सौदे पर करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सोमवार से शुरू हो रही भारत यात्रा से पहले इस सौदे को मंजूरी काफी अहम माना जा रहा है. भारत के रक्षा इतिहास में इससे पहले कभी भी इतनी बड़ी डिफेंस डील नहीं हुई है. इसे दुनिया की भी कुछ चुनिंदा बड़ी डील्स में शामिल किया जा रहा है. लेकिन, यह दुनिया की सबसे बड़ी डील नहीं है.
बीते साल पाकिस्तान के यार माने जाने वाले सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ एक सैन्य डील की थी. हालांकि, सऊदी अरब के साथ भारत के भी रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन 2025 में ही सऊदी और पाकिस्तान के बीच बने सैन्य गठबंधन के बाद से यह कहा जाने लगा कि दोनों मुल्क यानी पाकिस्तान और सऊदी मिलकर एक इस्लामिक नाटो की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं. इसी कारण सऊदी को पाकिस्तान का यार कहा जाने लगा.
खैर, मुद्दे पर लौटते हैं. बीते साल मई में अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विदेश यात्रा के लिए सऊदी अरब को चुना था. इसी दौरान दोनों देशों के बीच 142 बिलियन डॉलर केहथियार सौदे पर हस्ताक्षर किए गए थे. भारत और फ्रांस के बीच हो रहा राफेल सौदा करीब 36 से 40 बिलियन डॉलर का है. यानी इस सौदे से करीब चार गुना बड़ा है अमेरिका-सऊदी रक्षा सौदा.
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