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नींद में बोलना या चलना क्या कोई बीमारी है? जानिए इससे जुड़ी अहम बातें

आपने कभी देखा होगा कि आपके साथ सोया हुआ व्यक्ति अचानक नींद में कुछ बोलने लगता है, बड़बड़ाने लगता है. ऐसे लोगों को अंग्रेज़ी में ‘स्लीप टॉकर’ कहते हैं.

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कभी-कभी ये बातें इतनी अजीब या निजी होती हैं कि रिश्तों में बेवजह की कड़वाहट या ग़लतफ़हमी पैदा कर देती हैं. इसे मेडिकल भाषा में ‘सोम्निलोकी’ कहा जाता है.

नींद में बड़बड़ाना सिर्फ़ सुनने वाले की नींद नहीं ख़राब करता है, बल्कि बोलने वाले की सेहत के बारे में भी बहुत कुछ कहता है.

अधिकतर मामलों में नींद में बोलना एक सामान्य स्थिति मानी जाती है, लेकिन अगर आपकी बड़बड़ाहट की फ्रीक्वेंसी (बार-बार बोलना) बढ़ गई है, तो इसे नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है.

यहां तक कि कई लोग बड़बड़ाने के साथ-साथ हाथ-पैर चलाने लगते हैं या चीखते-चिल्लाते हैं.

नींद में बोलने के अलावा कुछ लोगों को इसमें चलने की भी आदत होती है. बोलने के मुक़ाबले नींद में चलना ज़्यादा ख़तरनाक हो सकता है.

आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और इससे बचने के क्या उपाय हैं.

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