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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज को तोड़ने का चल रहा हैं षड्यंत्र

रायपुर l  कल्चरल मार्क्सवाद स्टडी सर्कल की ओर से रायपुर के स्वदेशी भवन में Brain Storming Session (ब्रेन स्ट्रामिंग सत्र) का आयोजन किया गया. वर्तमान परिस्थितियों में कल्चरल मार्क्सवाद का समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव को लेकर यहां विशेषज्ञो ने अपनी राय रखी. कार्यक्रम में विशेष रूप से कैलाश चंद्र जी उपस्थिति में कल्चरल मार्क्सवाद स्टडी सर्कल छत्तीसगढ़ प्रान्त की ओर से इस दौरान अध्ययन रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया.

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समारोह में क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाशचंद्र जी ने कहा कि एक बात पक्की हैं. भाषा, बोली पहनावा, रीती रिवाज़ ये सब संस्कृति व्यक्त करने के माध्यम हैं ये संस्कृति नहीं हैं. संस्कृति इन सबसे बाहर ऊपर हैं और ये व्यक्त भी होती हैं. भारत का दर्शन कहता हैं धर्म की जय हो, सभी का कल्याण हो. सर्वें भवन्तु सुखिनः. कल्चरल मार्क्सवाद एक ग्लोबल फ़ोर्स हैं. कल्चर से तात्पर्य ट्रेडिशन जैसे बड़ों के पैर छूने चाहिए, वहीं पाश्चात्य देशो में धर्म नहीं धार्मिक व्यकति की जय होती हैं. भारतीय दर्शन कहता धर्म की जय हो विश्व का कल्याण हो. देश की संस्कृति एक हैं अलग अलग क्षेत्रों में भाषा अलग हो सकती है लेकिन भावनाए एक हैं, संस्कृति एक हैं. भारत का दर्शन कहता हैं कोई भी संस्कृति नष्ट नहीं होना चाहिए. भाषा के आधार पर राष्ट्र बने टिके नहीं. भारत देश का मूल प्राण धर्म हैं, जो परहित के लिए काम करता हैं. परहित की कामना से ऋषियों ने राष्ट्र की स्थापना की.

जनजाति क्षेत्र कार्य प्रमुख एवं विमर्श प्रमुख सतीश गोकुल पंडा जी ने कहा कि मार्क्सवाद वर्ग संघर्ष का सिद्धांत था जिसमें आर्थिक आधार पर लोगों को बांटा गया. लेकिन बाद में कम्युनिस्टो को लगा कि लोगों को केवल आर्थिक आधार पर नहीं बांटा जा सकता, उनको कल्चर, बोली, भाषा, रहन सहन, क्षेत्र के आधार पर लड़ाया गया. जो आज भी हम देश के अलग अलग हिस्सों में देख सकते हैं. कल्चरल मार्क्सवाद ना केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व की मानवता के लिए बड़ा खतरा हैं.

क्षेत्र प्रमुख कल्चरल मार्क्सवाद स्टडी समूह विश्वजीत जी ने कहा कि कल्चरल मार्क्सवाद ने हमें इतना प्रभावित कर दिया हैं कि हम उससे पूरी तरह जकड़ते जा रहें हैं. आज शत्रुओ के पास जो शस्त्र है उसका ज्ञान होना जरूरी हैं. शस्त्र के व्यक्ति का शरीर मार सकते हैं लेकिन व्यक्ति का ज्ञान और चरित्र नहीं.

प्रान्त सह कार्यवाहक गोपाल जी ने कहा कि हमारे देश में कुछ विरोधी ताकतें भारत से हिन्दू राष्ट्रीयत्व को समाप्त कर देना चाहती हैं. वैचारिक विप्रभम जो फैलाया जा रहा हैं उसको ठीक करने सब हम आप सब काम कर रहें हैं. सभी जिलों में समूह निर्माण करना हैं. आशुरी शक्तियों पर कम संख्या होने के बावजूद दैवीय शक्तियाँ हमेशा भारी रही हैं.

डॉ वर्णिका शर्मा ने बताया कि कल्चरल मार्क्सवाद का समूह छत्तीसगढ़ में 17 जुलाई 2024 से क्रियाशील है वर्तमान में समूह में 50 सदस्य एवं 20 सक्रिय सदस्य हैं इसके पांच विभिन्न सेक्टर हैं जिनके अंतर्गत कल्चरल मार्क्सवाद के विभिन्न पक्षों का अध्ययन किया जाता है जैसे शिक्षा शिक्षा एवं अनुसंधान कला एवं मनोरंजन मीडिया एवं पत्रकारिता कानून एवं न्याय राजनीति एवं सक्रियता आदि और इन प्रत्येक सेक्टर में पांच-पांच तीन से लेकर 5 अध्याय तक करने जो अपने विश्व में मार्क्सवाद के प्रभाव का अध्ययन करते हैं इसके साथ ही महीने के प्रत्येक गुरुवार को इसकी बैठक आभासी माध्यम में होती है जहां दो गुरुवर की बैठक प्रांत के लिए नियोजित है वही दो गुरुवर की बैठक समूचे क्षेत्र के लिए होती है अंतिम गुरुवार को सभी अपने क्षेत्र की विशेषज्ञ के अनुसार अध्ययन करते हैं क्षेत्र के अंतर्गत मध्य भारत मालवा महाकौशल और छत्तीसगढ़ प्रांत आते हैं ।

इस दौरान राजनीति, कला संस्कृति, शिक्षा, क़ानून एवं न्याय और मीडिया में कल्चरल मार्क्सवाद के प्रभाव को लेकर प्रेजेंटेशन भी दिया गया. अक्षता पुण्डरीक ने कला और संस्कृति पर अपना प्रेजेंटेशन दिया. उन्होंने कहा कि राजनीति में कल्चरल मार्क्सवाद प्रवेश कर रहा हैं. सनातन संस्कृति और हिन्दू धर्म के संबंध के प्रति भ्रान्तियाँ उतपन्न किया जा रहा हैं. महिलाओ और अल्पसंख्यक वर्ग कों पीड़ित और प्रताड़ित बताकर सहानुभूति बटोरी जा रही हैं. भारतीय त्यौहारो पर एजेंडे के तहत दीवाली और होली पर पानी की बर्बादी और वायु प्रदूषण जैसा एजेंडा चलाया जा रहा हैं. एक देश में सबको समान क़ानून समान अधिकार मिलने की बात थी लेकिन जबरिया झूठा एजेंडा फैला गया. मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए किसान आंदोलन पर झूठा एजेंडा फैलाकर आंदोलन को गलत दिशा में भटकाया गया. कई फिल्मों में जैसे पीके में हमारी देवी देवताओं पर गलत टिप्पणी की गई.कड़े क़ानून बनाकर अभिव्यक्ति की आजदी के नाम पर की जा रही ऐसे हरकतों पर पाबंदी लगना जरूरी हैं.

गौरव सिंघल ने कहा कि क़ानून और न्याय क्षेत्र में कल्चरल मार्क्सवाद को लेकर अपने प्रेजेंटेशन में कहा कि
संविधान का महत्वपूर्ण अंग हैं न्यायपालिका. समाज के सकात्मक पहलू को आगे रखकर इसके निगेटिव विषयो कों शामिल किया गया. ज्यूड्यूशरी की दखल हर मामले में दखल बढ़ गई. कल्चरल मार्क्सवाद के चलते सामजिक और धार्मिक विषयो पर निर्णय लिया गया. लिव इन रिलेशनशिप कों आजादी दे दी गई. धारा 377 कों भी वेलिडिटी प्रदान कर दी गई. हमारे भारत की संस्कृति और विचारधारा को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा हैं. कोर्ट की वेलिडिटी प्रदान करने के बाद नई जनरेशन और ज्यादा फ्री हैंड हो रही हैं. भारत का संविधान कभी इसकी अनुमति प्रदान नहीं करता.
वहीं देवेंद्र सिंह ने अपने प्रेजेंटेशन में कहा कि कल्चरल मार्क्सवाद एक आलोचनात्मक सिद्धांत हैं. धर्म के नाम पर तर्क दिया जाता हैं कि भगवान शिव विष पी सकते हैं तो आप क्यों नहीं. नशा छोड़ने के बजाय प्रसाद के तौर पर तर्क के साथ गलत को सही ठहराया जा रहा हैं. फिल्मों में भी कल्चरल मार्क्सवाद लगातार थोपा जा रहा हैं विलेन तस्कर और अपराधियों को हीरो बनाया जा रहा हैं. आज रिल्स और वेबसीरीज के नाम पर समाज पर गंदगी फैलाई जा रही हैं.
प्रकाश राव ने कहा कि पत्रकारिता के माध्यम से नाइरेटिव सेट किया गया. पूर्वाग्रह से ग्रसित पत्रकारिता की जा रही हैं. झूठी और आधी अधूरी गलत खबरों कों सोशल मीडिया में परोसा जा रहा हैं. कोविड में भी वेक्सीन कों लेकर तमाम तरह की भ्रान्तियाँ फैलाई जा रही हैं. यूट्यूब के माध्यम से अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर धर्म और संस्कृति पर हमला हो रहा हैं.

समारोह में पत्रकार, बुद्धिजीवी, अधिवक्ता, शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी लोग सम्मिलित थे.

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