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पंजाब में बाढ़ का खतरा: सात जिलों में तबाही, स्कूल बंद और छुट्टियां रद्द

पंजाब में बाढ़ का कहर: सात जिलों में मचा हाहाकार!

बिगड़ते हालात और बाढ़ का बढ़ता खतरा-पंजाब में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। होशियारपुर, पठानकोट, गुरदासपुर, तरनतारन, फाजिल्का, फिरोजपुर और अमृतसर जैसे सात जिलों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। हजारों एकड़ में फैली किसानों की मेहनत की फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं। नदियां और नहरें अपने उफान पर हैं, जिसके चलते कई गांव पूरी तरह से पानी में समा गए हैं। टूटी हुई सड़कें और जलमग्न रास्ते कई इलाकों को बाकी दुनिया से काट चुके हैं। ऐसे भयावह हालात में लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं, जबकि प्रशासन स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

बचाव कार्य में जुटीं समर्पित टीमें-हालात के बेकाबू होने के बीच, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल और पंजाब पुलिस की टीमें दिन-रात बचाव और राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। कई प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक सैकड़ों लोगों को बाढ़ग्रस्त इलाकों से निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया जा चुका है। कई गांवों में घरों में पानी भर जाने के कारण लोग अपनी छतों और ऊंची जगहों पर आसरा लेने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और बचाव दल के साथ पूरा सहयोग करें ताकि राहत कार्य सुचारू रूप से चल सकें।

बांधों से छोड़ा गया पानी: आफत का सबब-बाढ़ की इस भीषण तबाही का एक बड़ा कारण बांधों से छोड़ा गया पानी है। पौंग डैम, रणजीत सागर डैम और भाखड़ा डैम से लगातार बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। पिछले 24 घंटों में ही रणजीत सागर डैम से लगभग 1,70,000 क्यूसेक, पौंग डैम से 63,247 क्यूसेक और भाखड़ा डैम से करीब 43,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस अतिरिक्त पानी के बहाव से रावी, सतलुज और ब्यास नदियां अपने किनारों को तोड़कर भयानक रूप से उफन रही हैं। कई जगहों पर तटबंध टूटने से गांवों में पानी घुस गया है, जिससे खेतों से लेकर घरों तक सब कुछ जलमग्न हो गया है।

स्कूल बंद, छुट्टियां रद्द: सीएम का अहम फैसला-मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 27 से 30 अगस्त तक राज्य के सभी सरकारी और निजी स्कूलों, चाहे वे प्राइमरी हों, सेकेंडरी या सीनियर सेकेंडरी, सभी को बंद रखने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही, राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। प्रशासन को हर समय 24 घंटे पूरी तरह से सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया है कि लोगों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासन की अपील-मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक भारी बारिश की आशंका जताई है, जिसके मद्देनजर सरकार और प्रशासन पूरी तरह से हाई अलर्ट पर हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वे अत्यंत सावधानी बरतें और किसी भी जोखिम वाले इलाकों से दूर रहें। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और राहत कार्यों को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन का मानना है कि इस मुश्किल घड़ी में जनता का सहयोग ही सबसे बड़ी ताकत साबित होगा।

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