
पंजाब में बारिश का कहर: जब प्रकृति ने दिखाया रौद्र रूप! ️
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मुश्किलें बढ़ीं, ज़िंदगी थमी: हर तरफ हाहाकार-पंजाब में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने लोगों की ज़िंदगी को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि हर दिन एक नई मुसीबत सामने आ रही है। कई जगह घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं, तो वहीं कुछ लोग तो दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज हो गए हैं। सरकार ने राहत शिविर तो लगाए हैं, लेकिन हम सब जानते हैं कि घर की जगह कोई नहीं ले सकता। ऐसे में, कई परिवार अपनी ज़िंदगी को बिल्कुल शुरू से, यानी ज़ीरो से शुरू करने को मजबूर हैं। लोगों के मन में बस यही सवाल है कि आखिर ये बुरे दिन कब खत्म होंगे और कब वे फिर से सुकून से जी पाएंगे।
नदियों का बढ़ता जलस्तर: खतरे की घंटी!-पंजाब की जीवनदायिनी नदियाँ, जैसे रावी, ब्यास और सतलुज, इस वक्त खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। पिछले लगातार पाँच दिनों से पानी का बढ़ता स्तर स्थिति को और भी भयावह बना रहा है। इस त्रासदी में अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है और हज़ारों परिवार बेघर हो चुके हैं। चिंता की बात यह है कि अनुमान के मुताबिक, करीब 10,000 से ज़्यादा पशुधन भी इस बाढ़ की भेंट चढ़ गया है। कई गाँव पूरी तरह से पानी में डूब चुके हैं, खेत बर्बाद हो गए हैं, और लोगों के सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस प्राकृतिक आपदा का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी बहुत बुरा पड़ रहा है।
तबाह हुए गाँव और बंजर होती ज़मीन: किसानों की आँखों में आँसू-सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 1018 गाँव इस बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, और तीन लाख एकड़ से भी ज़्यादा की उपजाऊ ज़मीन पानी में डूबकर पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। पंजाब के किसान, जिनकी पूरी ज़िंदगी खेतों पर टिकी होती है, आज खुद को बेबस और लाचार महसूस कर रहे हैं। बाढ़ ने न केवल उनकी खड़ी फसलों को तबाह किया है, बल्कि उनके आने वाले कल की उम्मीदों को भी झकझोर कर रख दिया है। इतने बड़े पैमाने पर ज़मीन के बर्बाद होने से आने वाले समय में पंजाब में अनाज की कमी का सामना भी करना पड़ सकता है।
जान-माल का भारी नुकसान: हर तरफ मातम-पंजाब में आई इस विनाशकारी बाढ़ ने इंसानों और जानवरों दोनों की जान ली है। हजारों की संख्या में पशु या तो बह गए या फिर बाढ़ के कारण फैली बीमारियों से मर गए। यह नुकसान किसानों और पशुपालकों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। इंसानों की जान भी लगातार खतरे में रही है, और कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि, सरकार और प्रशासन बचाव कार्य में दिन-रात लगे हुए हैं, लेकिन पानी का बढ़ता वेग और फैलाव हर मदद को कमज़ोर साबित कर रहा है।
राहत कार्य जारी, पर ज़रूरतें अपार-पंजाब सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि अब तक 11,330 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है। बचाव दल लगातार अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं और कई इलाकों में राहत शिविर भी स्थापित किए गए हैं। लोगों को भोजन, पानी और रहने की व्यवस्था मुहैया कराने की पूरी कोशिश की जा रही है। लेकिन, इतने बड़े पैमाने पर हुई तबाही के सामने यह राहत कहीं न कहीं कम पड़ रही है। बहुत से लोग शिविरों में पहुँच गए हैं, पर अभी भी कई लोग अपने तबाह हो चुके घरों में फँसे हुए हैं और मदद का इंतज़ार कर रहे हैं।
1988 से भी बदतर हालात: अभूतपूर्व तबाही-पंजाब के लोगों को साल 1988 की बाढ़ ज़रूर याद होगी, जब करीब 11 लाख क्यूसेक पानी ने पूरे प्रदेश को तबाह कर दिया था। लेकिन इस बार के हालात उससे भी कहीं ज़्यादा गंभीर हैं। इस बार 15 लाख क्यूसेक से भी ज़्यादा पानी ने माझा और दोआबा जैसे क्षेत्रों के सात जिलों को बुरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। इस बाढ़ ने न सिर्फ लोगों के सिर से छत छीनी है, बल्कि उनकी आर्थिक कमर भी तोड़ दी है। यह साफ है कि पंजाब को इस भारी तबाही से उबरने और फिर से खड़ा होने में काफी लंबा समय लगेगा।
सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाके: कहाँ मचा है सबसे ज़्यादा कोहराम?-पंजाब के पठानकोट, होशियारपुर, गुरदासपुर, तरनतारन, कपूरथला और फिरोजपुर जैसे जिले इस बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, बरनाला, मोगा और अमृतसर के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ के पानी ने भारी तबाही मचाई है। इन इलाकों में लोगों का जीवन पूरी तरह से थम सा गया है। स्कूल, अस्पताल, दुकानें और रोज़मर्रा की ज़रूरतें सभी बाढ़ की भेंट चढ़ चुकी हैं। यहाँ के लोग बस यही दुआ कर रहे हैं कि जल्द से जल्द हालात सामान्य हो जाएं और उन्हें इस मुश्किल घड़ी से निकलने में मदद मिले।

