
इंफोसिस का धमाकेदार ऐलान: 18,000 करोड़ का शेयर बायबैक, निवेशकों की बल्ले-बल्ले!
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!शेयरों में आई तूफानी तेजी: निवेशकों को मिला बड़ा तोहफा-आईटी की दुनिया की जानी-मानी कंपनी इंफोसिस ने हाल ही में बाजार में एक ऐसी खबर दी है जिसने सभी का ध्यान खींच लिया है। कंपनी के बोर्ड ने 18,000 करोड़ रुपये के सबसे बड़े शेयर बायबैक को हरी झंडी दिखा दी है। इस फैसले के आते ही सुबह के ट्रेडिंग सेशन में इंफोसिस के शेयरों में 2% से भी ज्यादा की उछाल देखी गई। यह खबर उन सभी निवेशकों के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है जो कंपनी में विश्वास रखते हैं। इस तरह के बड़े कदम अक्सर निवेशकों का भरोसा बढ़ाते हैं और शेयरों में एक सकारात्मक माहौल बनाते हैं, जिससे कंपनी के प्रति लोगों का रुझान और भी मजबूत होता है।
18,000 करोड़ का महा-बायबैक: क्या है पूरा प्लान?-कंपनी ने विस्तार से बताया है कि वे कुल 10 करोड़ इक्विटी शेयर वापस खरीदेंगे, जिनका फेस वैल्यू 5 रुपये प्रति शेयर होगा। यह कंपनी की कुल जारी इक्विटी पूंजी का लगभग 2.41% हिस्सा है। खास बात यह है कि यह बायबैक 1,800 रुपये प्रति शेयर की दर से किया जाएगा, जो पिछले दिन के बंद भाव 1,509.5 रुपये की तुलना में लगभग 19% अधिक है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि इंफोसिस अपने शेयरधारकों को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाने की कोशिश कर रही है और उन्हें कंपनी की सफलता में हिस्सेदार बनाना चाहती है।
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का बड़ा फैसला: शेयरधारकों के हित में कदम-इंफोसिस ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में यह स्पष्ट किया है कि उनके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 11 सितंबर 2025 को हुई थी, जिसमें इस विशाल बायबैक प्रस्ताव पर सहमति बनी। 1,800 रुपये प्रति शेयर के भाव से 18,000 करोड़ रुपये का यह बायबैक अब शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद ही आगे बढ़ पाएगा। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया है कि यह निर्णय पूरी तरह से शेयरधारकों के हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सके।
मजबूत वित्तीय स्थिति का प्रमाण: क्यों है यह संभव?-इस बड़े बायबैक की क्षमता कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और नकदी भंडार को भी दर्शाती है। जून 2025 की तिमाही में, इंफोसिस ने 884 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी लगभग 7,805 करोड़ रुपये का फ्री कैश फ्लो दर्ज किया था। इसी मजबूत आर्थिक आधार के कारण कंपनी बिना किसी अतिरिक्त दबाव के इतने बड़े पैमाने पर बायबैक करने में सक्षम है। इसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव न केवल निवेशकों के विश्वास पर पड़ेगा, बल्कि कंपनी के मूल्यांकन को भी बढ़ावा मिलेगा।
टीसीएस से तुलना: आईटी सेक्टर में नई होड़?-इंफोसिस का यह कदम आईटी सेक्टर की एक और दिग्गज कंपनी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बायबैक की याद दिलाता है। साल 2022 में, टीसीएस ने भी 4 करोड़ इक्विटी शेयर 4,500 रुपये प्रति शेयर के भाव से खरीदे थे, जिसकी कुल राशि भी 18,000 करोड़ रुपये थी। ऐसे में, इंफोसिस अब टीसीएस के इस बड़े कदम के बराबर खड़ा नजर आ रहा है, और यह आईटी सेक्टर में निवेशकों के लिए एक रोमांचक मुकाबला पेश कर रहा है।
आगे क्या उम्मीद करें?-इंफोसिस का यह बायबैक प्रस्ताव शेयरधारकों की मंजूरी पर टिका है। यदि सब कुछ ठीक रहा और मंजूरी मिल गई, तो कंपनी इसे जल्द ही लागू करेगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस कदम से न केवल इंफोसिस के शेयरों की कीमत में मजबूती आएगी, बल्कि निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न में भी इजाफा होगा। यह आने वाले समय में आईटी सेक्टर में बायबैक के ट्रेंड को और भी बढ़ावा दे सकता है।

