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मिडिल ईस्ट तनाव कम होने से थमी तेल कीमतों की गिरावट

बिजनेस डेस्कः जून के बाद सबसे बड़ी गिरावट देखने के बाद कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हो गई हैं। इसकी वजह अमेरिका की ओर से यह संकेत मिलना है कि फिलहाल ईरान पर सैन्य कार्रवाई टाली जा सकती है। ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका बढ़ने के बीच दो सत्रों में तेल की कीमतों में करीब 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।

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गुरुवार को 4.6 फीसदी की बड़ी गिरावट के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 59 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि ब्रेंट क्रूड 64 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान पर हमले की योजना को फिलहाल टालने का आग्रह किया है।

इस घटनाक्रम से यह संभावना कम हो गई है कि अमेरिका ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों पर तुरंत सैन्य प्रतिक्रिया देगा। अगर ऐसा होता, तो शिपिंग रूट्स और तेल उत्पादन में बाधा आ सकती थी, जिससे सप्लाई पर असर पड़ता।

मिडिल ईस्ट में बढ़ रही है अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

हालांकि, अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में अतिरिक्त सैन्य उपकरण क्षेत्र में भेजे जाने की उम्मीद है और कम से कम एक एयरक्राफ्ट कैरियर पहले ही रास्ते में है।

इसी बीच, ट्रैफिगुरा ग्रुप लैटिन अमेरिकी देश से अपना पहला ऑयल कार्गो कुराकाओ स्थित स्टोरेज फैसिलिटी में उतारने की तैयारी में है। यह कदम अमेरिका सरकार की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत तेल बैरल्स की मार्केटिंग को नियंत्रित किया जा रहा है।

वेनेजुएला और ब्लैक सी फैक्टर

कैरिबियन क्षेत्र में अमेरिका प्रतिबंधित जहाजों के इस्तेमाल को लेकर सख्ती बढ़ा रहा है। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के पास छठे ऑयल टैंकर को जब्त कर लिया है।

विश्लेषकों के मुताबिक, 8 जनवरी से तेल की कीमतों में आई तेजी के बाद इस हफ्ते के अंत तक बाजार में ज्यादा हलचल की उम्मीद नहीं है। इसकी बड़ी वजह यह चिंता है कि अमेरिका ओपेक के चौथे सबसे बड़े तेल उत्पादक देश को निशाना बना सकता है, जिससे रोजाना 30 लाख बैरल से ज्यादा उत्पादन खतरे में पड़ सकता है।

इसके अलावा, वेनेजुएला में जारी राजनीतिक अस्थिरता और ब्लैक सी क्षेत्र से कजाखस्तान के तेल निर्यात में रुकावट ने भी कीमतों को सहारा दिया है। हालांकि, कमजोर मांग के मुकाबले उत्पादन में तेज बढ़ोतरी की आशंका के चलते तेल बाजार अब भी दबाव में है और 2020 के बाद के सबसे खराब दौर से उबरने की कोशिश कर रहा है।

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