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आदि कैलाश और ओम पर्वत: जहां भगवान शिव ने किया था तांडव

हल्द्वानी । उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन करने के लिए आदि कैलाश यात्रा आयोजित की जाती है जो एक लोकप्रिय धार्मिक यात्रा होने के साथ ही यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी रखती है। भगवान शिव के भक्तों के लिए आदि कैलाश और ओम पर्वत एक महत्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि भगवान शिव माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय के साथ यहां विराजमान हैं।

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कहा जाता है कि आदि कैलाश वह स्थान है जहां भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था। साथ ही ऋषि अष्टावक्र को अपना दिव्य रूप दिखाया था। आदि कैलाश का आध्यात्मिक महत्व दुनिया भर से अनुयायियों को आकर्षित करता है।

पंच कैलाश में से एक

सनातन मान्यता में पंच कैलाश (5 कैलाश) माने गए हैं। जिनमें कैलाश मानसरोवर, आदि कैलाश, मणि महेश, किन्नौर कैलाश और श्रीखंड महादेव कैलाश शामिल है। इनमें आदि कैलाश को छोटा कैलाश और बाबा कैलाश भी कहा जाता है। कैलाश पर्वत की प्रतिकृति का आदि कैलाश पंच कैलाश में से दूसरा कैलाश है।

जोलिंगकोंग माउंट आदि कैलाश का आधार और दृश्य बिंदु है जहां आप ध्यान लगा सकते हैं, यहां चिल्लाने की अनुमति नहीं है। मान्यता है कि भगवान शिव यहां ध्यान करते हैं। आदि कैलाश उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में भारत के अंतिम गांव कुटी के साथ भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित है। इस गांव का नाम पांडवों की मां कुंती के नाम पर रखा गया है।

इसे हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। पुराणों के अनुसार, आदि कैलाश भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का मुख्य पड़ाव था, जिसकी उत्पत्ति कैलाश पर्वत मानसरोवर से हुई।

खास बात ये भी है कि आदि कैलाश भारत के सबसे उल्टे पहाड़ों में से एक है। माना जाता है कि राक्षसराज रावण ने बहुत लंबे समय तक यहां भगवान शिव का ध्यान किया, इसके बाद उसे अपार शक्ति, बल और 10 सिर का आशीर्वाद मिला। वहीं पांडव भाइयों और ऋषि वेद व्यास ने भी यहां बहुत लंबे समय तक ध्यान किया था।

जाने के लिए जरूरी दस्तावेज

आदि कैलाश की यात्रा के लिए आपको धारचूला से इनर लाइन परमिट लेना होगा। इसके लिए एक विशेष परमिट धारचूला में एसडीएम द्वारा जारी किया जाता है। यात्रा के लिए एक वैध फोटो पहचान पत्र, पते का प्रमाण और अधिकारियों द्वारा बताए गए दस्तावेज जमा करने होंगे। साथ ही यात्रा के लिए शारीरिक रूप से फिट आवश्यक है।

पूर्णागिरी मंदिर समिति के अध्यक्ष किशन तिवारी बताते हैं कि कैलाश भगवान शिव का घर भी है। इस पर्वत के दर्शन मात्र से आंतरिक आत्मा प्रबुद्ध हो जाती है। साथ ही यहां मौजूद ब्रह्मांडीय ऊर्जा नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में बदल देती है।

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