
राज्य के विकास कार्यों पर बड़ी बैठक: मुख्य सचिव ने दिए ज़रूरी निर्देश, योजनाओं में तेज़ी लाने का फोकस
सरकारी कामकाज में तेज़ी: विकास की नई राह- मुख्य सचिव के निर्देशों से राज्य के विकास को मिलेगा नया आयाम। जियो-टैगिंग से लेकर हरियाली तक, कई अहम फैसले लिए गए हैं। आइए जानते हैं इन निर्देशों के बारे में विस्तार से।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जियो-टैगिंग: पारदर्शिता और जवाबदेही का नया अध्याय सितंबर तक सभी सरकारी संपत्तियों की जियो-टैगिंग और जियो-फेंसिंग ज़रूरी है। इससे योजनाओं पर नज़र रखना और ज़मीन की जानकारी जुटाना आसान होगा। इससे काम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
वन भूमि प्रबंधन: विकास और पर्यावरण का बेहतर तालमेल विकास के लिए ज़मीन की ज़रूरत है। डीएम और डीएफओ हर महीने मिलकर वन भूमि से जुड़े मामलों को सुलझाएँगे। इसके लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया (SOP) भी बनाई जाएगी, जिससे काम में तेज़ी आएगी।
भूमि बैंक और क्षतिग्रस्त वन भूमि: विकास के लिए ज़मीन का बेहतर प्रबंधन ज़मीन का बेहतर प्रबंधन विकास के लिए बहुत ज़रूरी है। सभी ज़िलों को भूमि बैंक के नियमों का पालन करना होगा और क्षतिग्रस्त वन भूमि की जानकारी देनी होगी। इससे विकास योजनाओं के लिए ज़मीन का पता लगाना आसान होगा।
जन शिकायतों का समाधान: समय पर और बेहतर सेवाएँ पब्लिक ग्रीवांस पोर्टल को और मज़बूत बनाया जाएगा। इसमें सेवा अधिकार अधिनियम से जुड़ी सुविधाएँ भी जोड़ी जाएँगी, ताकि लोगों को समय पर और बेहतर सेवाएँ मिल सकें।
सफलता की कहानियाँ: सीखने और आगे बढ़ने का रास्ता हर जिले को हर महीने दो सफलता की कहानियाँ साझा करनी होंगी। इससे अच्छे कामों को राज्य भर में लागू किया जा सकेगा और प्रशासन में सुधार आएगा। सरकारी कामों में स्थानीय उत्पादों का इस्तेमाल भी ज़रूरी होगा।
हरेला पर्व और वृक्षारोपण: पर्यावरण संरक्षण का संकल्प हरेला पर्व पर एक बेहतरीन पौधारोपण योजना बनाई जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यह अभियान सिर्फ़ दिखावा न हो, बल्कि पर्यावरण के लिए सच्चा योगदान दे।
क्लस्टर मॉडल स्कूलों के लिए परिवहन योजना: शिक्षा में बेहतर सुविधाएँ क्लस्टर मॉडल स्कूलों के लिए परिवहन योजना बनाई जाएगी। पहले चरण के स्कूलों के प्रमाण पत्र जल्दी भेज दिए जाएँगे, ताकि अगली किश्त की फंडिंग में देरी न हो।

