
गर्मी से बचने के लिए कोल्ड ड्रिंक पीना खतरनाक, आंत पर करती हैं घातक असर, इन बीमारियों का है खतरा
सावधान हो जाइए ! गर्मी अब खुली चेतावनी बन चुकी है। कई जगह तापमान 43 डिग्री के पार जा चुका है। हाल ये है कि दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में 19 भारत के हैं और मौसम विभाग ने साफ कहा है पारा अभी और चढ़ेगा। मतलब धूप तेज, हवा गर्म होगी और यही गर्म हवा लू बनकर जल्दी शरीर का सिस्टम बिगाड़ने वाली है। हां लेकिन कहानी इतनी भर नहीं है। ध्यान से सुनिएगा खतरा सिर्फ बाहर की लू नहीं है। एक लू बाहर चल रही है और दूसरी लोग खुद से शरीर के अंदर उतार रहे हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जी हां प्यास बुझाने के नाम पर पानी, छाछ, नींबू पानी या नारियल पानी छोड़कर, लोग कोल्ड ड्रिंक, शुगरी ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक पकड़ लेते हैं। इसे पीने से राहत का एहसास तुरंत जरूर होता है, लेकिन अंदर खेल कुछ और चलता है। क्योंकि इन ड्रिंक्स में सिर्फ ठंडक नहीं होती, अक्सर ज्यादा शुगर, कैफीन, एसिड, आर्टिफिशियल स्वीटनर और दूसरे स्टिम्युलेंट होते हैं। एनर्जी ड्रिंक शरीर को थोड़ी देर के लिए किक देती है, लेकिन बाद में ज्यादा थकान, बेचैनी और क्रैश भी दे सकती है। बार-बार पीने से ब्लड शुगर और इंसुलिन गड़बड़ा सकते हैं। इससे मोटापा, डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, हाई बीपी और दिल पर दबाव बढ़ सकता है।
खतरनाक है कोल्डड्रिंक पीना
यही नहीं ऐसे ड्रिंक्स दांत, हड्डियां, एसिडिटी, लिवर और किडनी तक को नुकसान पहुंचाते हैं और गर्मी में तो सबसे बड़ा धोखा ये है कि ठंडी लगने वाली ड्रिंक भी डिहाइड्रेशन बढ़ा सकती है। यानि बाहर से लू, अंदर से गलत ड्रिंक, नतीजा सेहत पर डबल अटैक और इन सब में एक बात जो सबसे अहम है, वो ये कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों को कैफीन वाले ड्रिंक्स रेगुलर देना बिल्कुल ठीक नहीं। उनके दिमाग, हड्डियों और मांसपेशियों के विकास पर असर पड़ता है। मतलब ये की एनर्जी देने का दावा करने वाली ड्रिंक्स असल मे पूरी ताकत खीच लेती है और ये मैं खासतौर से Gen Z को समझने की जरूरत है। सही मायने मे cool दिखना है तो समझदारी इसी में है कि प्यास लगने पर पानी, नींबू-पानी, छाछ, सत्तू, नारियल पानी चुनिए। क्योंकि गर्मी में असली एनर्जी बोतल की गैस से नहीं, सही हाइड्रेशन से मिलती है।
कोल्ड ड्रिंक से नुकसान
- मोटापा बढ़ता है
- फैटी लिवर का खतरा
- किडनी प्रॉब्लम
- हाई बीपी की समस्या
- हार्ट प्रॉब्लम
- डिमेंशिया का रिस्क

