
विधानसभा में बस्तर की आंगनबाड़ियों की बदहाल स्थिति पर सरकार घिरी
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बस्तर संभाग की आंगनबाड़ियों में मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। इस मामले में कांग्रेस विधायक ने महिला एवं बाल विकास मंत्री को घेरते हुए कई सवाल पूछे, जिन पर मंत्री संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं।
कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने प्रश्नकाल के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से बस्तर संभाग में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि बस्तर संभाग के जिलों में कुल कितने आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, उनमें से कितने भवनयुक्त हैं, कितने भवन विहीन हैं और कितने जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता तथा नए भवनों की स्वीकृति की स्थिति भी पूछी।
जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि बस्तर संभाग में कुल 9876 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जबकि मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या शून्य है। इनमें से 7667 केंद्र भवनयुक्त हैं, जबकि 2209 केंद्र भवन विहीन हैं। इसके अलावा 962 भवन जर्जर स्थिति में हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि 6431 केंद्रों में पेयजल और 5632 केंद्रों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है।
मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान नए भवनों के निर्माण, पेयजल और शौचालय के लिए स्वीकृतियां दी गई हैं। वहीं विधानसभा क्षेत्र बस्तर में भवनविहीन और जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों की केंद्रवार जानकारी अलग से उपलब्ध कराई जाएगी।
हालांकि जब विधायक लखेश्वर बघेल ने पूछा कि जर्जर और भवन विहीन आंगनबाड़ियों के लिए नए भवनों की स्वीकृति कब तक दी जाएगी, तो मंत्री ने कहा कि भवन निर्माण की स्वीकृति वित्तीय संसाधनों और बजट की उपलब्धता के आधार पर दी जाती है, इसलिए इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।
मंत्री के इस जवाब पर विपक्ष ने असंतोष जताया और कहा कि बस्तर जैसे आदिवासी क्षेत्र में आंगनबाड़ियों की बदहाल स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।

