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तेंदूपत्ता पारिश्रमिक से बच्चों की पढ़ाई हो रही है आसान: राकेश्वरी ध्रुव

रायपुर। ग्राम सोरम की  राकेश्वरी ध्रुव बतातीं हैं कि वे तेन्दूपत्ता तोड़ने जातीं हैं और जंगल में भी काम करतीं हैं। उन्होंने बताया कि पहले तेन्दूपत्ता संग्रहण प्रति मानक बोरा 4 हजार रूपये मिलता था, अब हमें 5 हजार 500 रूपये मिल रहा है, जिससे परिवार के खर्च पूरा चला लेतीं हैं और बच्चों की पढ़ाई तथा अन्य आवश्यक जरूरतों में भी राशि को खर्च कर रहें हैं। इसके लिए उन्होंने प्रदेश के मुखिया   विष्णु देवा साय का धन्यवाद ज्ञापित किया। धमतरी जिले के 29 हजार 830 संग्राहकों को 13 करोड़ दो लाख 23 हजार 940 रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

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हरा सोना के नाम से जाना जाने वाला तेंदूपत्ता का संग्रहण ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के अतिरिक्त आय का एक पूरक स्त्रोत है। छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर तेंदूपत्ता का संग्रहण लघु वनोपज के रूप में किया जाता है। लाखों ग्रामीण इस कार्य से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य के तेन्दूपत्ता संग्राहकों को अब 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है, जिससे संग्राहकों को पहले के 4 हजार प्रति मानक बोरा की तुलना में 15 सौ रुपए अधिक मिल रहे हैं, इससे संग्राहकों को तेंदूपत्ता संग्रहण से होने वाली आय बढ़ी है।

 

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