छत्तीसगढ़

मजदूरी कर जिंदगी काटने वाली दसरी बाई का बदला जीवन, पीएम आवास योजना से साकार हुआ पक्के घर का सपना

जीवन भर दूसरो के लिए घर बनाने वाली दसरी बाई को अपना घर बनने से केवल रहने की जगह नहीं बल्कि सुरक्षा सम्मान और स्थिरता का आधार मिल गया

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मेरे संघर्षो को आखिरकार एक पता मिल गया – दसरी बाई साहू

रायपुर – भारत गणराज्य के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर केन्द्र सरकार द्वारा संचालित लोक हितकारी प्रधानमंत्री आवास योजना ने राजधानी रायपुर शहर क्षेत्र की निर्माण मजदूर  दसरी बाई साहू को पक्का घर दिलवाकर उनके व उनके परिवार की दिशा बदल दी है। प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा अशोक नगर गुढियारी में रायपुर नगर निगम अंतर्गत डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वार्ड कमांक 19 क्षेत्र अंतर्गत निर्माण मजदूर दसरी बाई साहू को पक्का आवास मिलने से उनके परिवार को केवल रहने की जगह नहीं बल्कि सुरक्षा सम्मान और स्थिरता का आधार प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मिल गया है। समाज के जरूरतमंद लोगो को प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत पात्रतानुसार पक्का आवास देने का कम तेजी से निरंतर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश एवं उपमुख्यमंत्री नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग  अरूण साव के मार्गदर्शन में नगर निगम रायपुर क्षेत्र में महापौर मीनल चौबे एवं आयुक्त  संबित मिश्रा के निर्देशन में प्रगति पर है।
जहाँ अपना घर, वहीं जीवन का भरोसा धूप, धूल और सीमेंट के बीच बीता जीवन…. दूसरों के सपनों को आकार देते देते कब अपने सपनों को इंतजार की आदत पड़ गई, पता ही नहीं चला। दशरी का जीवन बचपन से ही संघों की पाठशाला रहा। न भाई-बहनों का साथ मिला और न ही पिता का साया लंबे समय तक सिर पर रह सका। छोटी-सी उम्र में ही उन्होंने जीवन की कठोर सच्चाइयों को करीब से देखा। समय के साथ विवाह हुआ, लेकिन जिम्मेदारियों और अभावों का सिलसिला जारी रहा। पति के साथ निर्माण मजदूर के रूप में काम करते हुए उन्होंने अनगिनत मकान बनते देखे, लेकिन अपना घर हमेशा एक दूर का सपना ही लगता था। हर दिन वे किसी न किसी परिवार के लिए दीवारें खड़ी करतीं, छत डालतीं और नए घरों को आकार देतीं। मगर दिन के अंत में लौटना एक ऐसे आशियाने में होता था, जहाँ स्थायित्व और सुरक्षा का भरोसा नहीं था। सीमित आय, बच्चों की परवरिश और भविष्य की चिंता के बीच अपना पक्का घर बनाना लगभग असंभव प्रतीत होता था। फिर एक दिन प्रधानमंत्री आवास योजना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिलने के बाद पहली बार उन्हें लगा कि उनका सपना भी सच हो सकता है। जब अपने घर का निर्माण शुरू हुआ, तो वह केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं थाय वह वर्षों की मेहनत, त्याग और उम्मीदों का साकार रूप था। सबसे भावुक क्षण वह था, जब एक निर्माण मजदूर के रूप में वे स्वयं अपने घर के निर्माण में हाथ बंटा रही थीं। हर ईंट मानो उनके संघर्ष की कहानी कह रही थी और हर दीवार एक नए भविष्य का वादा कर रही थी। आज उस घर की पक्की छत के नीचे उनके तीनों बच्चों की मुस्कान खिलती है। बेटी का भविष्य अब चिंता नहीं, बल्कि विश्वास का विषय है। बेटा, जो दर्जी का काम करता है, अपने घर की वजह से नई ऊर्जा और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ रहा है। परिवार को अब केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षा, सम्मान और स्थिरता का आधार मिल गया है।

दसरी की जुबानी

जीवन भर मैंने दूसरों के पर बनाए थे। कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मेरा भी अपना पर होगा। आज जब अपने में खड़ी होती है। तो लगता है कि मेरे संघर्षो को आखिरकार एक पता मिल गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना ने उन्हें केवल एक मकान नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास, सामान और बेहतर कल का भरोसा दिया है। मकान केवल चार दीवारे नहीं होता, यह वह स्थान होता है जहाँ संघर्षो *को विश्राम और सपनों को उड़ान मिलती है।

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