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घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने और विदेशी संस्थाओं पर निर्भरता कम करने के लिए एक रोडमैप

घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने और विदेशी संस्थाओं पर निर्भरता कम करने के लिए एक रोडमैप

सरकार ने देश को नौवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक पहलें की हैं। ये प्रयास घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने और विदेशी संस्थाओं पर निर्भरता कम करने के लिए एक रोडमैप/व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। घरेलू नौवहन उद्योग की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

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(i) जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति (2016-2026):

भारत सरकार ने भारतीय शिपयार्डों को वित्तीय सहायता देने के लिए नौ दिसंबर 2015 को भारतीय शिपयार्डों के लिए वित्तीय सहायता नीति को मंजूरी दे दी है। केवल वे जहाज ही वित्तीय सहायता के पात्र होंगे, जिनका निर्माण वैध अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने के बाद शुरू होगा। जिन जहाजों का निर्माण और वितरण अनुबंध की तारीख से तीन साल की अवधि के भीतर किया जाता है, वे नीति के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए पात्र हैं। विशेष जहाजों के लिए, डिलीवरी अवधि छह साल तक बढ़ाई जा सकती है। भारतीय शिपयार्डों को वित्तीय सहायता अनुबंध मूल्य, वास्तविक प्राप्तियों, उचित मूल्य (जो भी कम हो) का 20 प्रतिशत होगी। नीति के तहत, दी जाने वाली वित्तीय सहायता में हर तीन साल में 3 प्रतिशत की कमी की जाएगी।

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(ii) भारतीय नौवहन कंपनियों को राज-सहायता:

भारत में व्यापारिक जहाजों के ध्वजांकन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी योजना 2021 में पांच वर्षों में वितरित किए जाने वाले 1,624 करोड़ रुपए के बजट के साथ शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य कच्चे तेल, एलपीजी (तरल पेट्रोलियम गैस), कोयला और उर्वरक जैसे सरकारी कार्गो के आयात के लिए मंत्रालयों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा जारी वैश्विक निविदाओं में भाग लेने वाली भारतीय नौवहन कंपनियों को सब्सिडी प्रदान करना है।

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(iii) राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल (आरओएफआर):

यह विदेशी ध्वज वाले जहाजों द्वारा दी जाने वाली सबसे कम बोली से मेल खाने के लिए भारतीय ध्वज वाले जहाजों को प्राथमिकता देता है, जिससे भारतीय ध्वज वाले जहाजों की मांग बढ़ जाती है। भारत में भारतीय ध्वज के तहत टन-भार और जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए, निविदा प्रक्रिया के माध्यम से जहाजों को किराए पर लेने में पहले राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल देने के मानदंड को संशोधित किया गया है, ताकि भारत को टन-भार और जहाज निर्माण के हवाले से आत्मनिर्भर बनाया जा सके। आरओएफआर का संशोधित पदानुक्रम निम्नलिखित है:

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भारतीय निर्मित, भारतीय ध्वज और भारतीय स्वामित्व
भारतीय निर्मित, भारतीय ध्वजांकित और भारतीय आईएफएससीए (अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण) का स्वामित्व
विदेशी निर्मित, भारतीय ध्वज और भारतीय स्वामित्व
विदेशी निर्मित, भारतीय ध्वजांकित और भारतीय आईएफएससीए का स्वामित्व
भारतीय निर्मित, विदेशी ध्वजांकित और विदेशी स्वामित्व वाला

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इन पहलों ने भारत की जीडीपी वृद्धि में नौवहन क्षेत्र के योगदान को बढ़ावा दिया है। पिछले दशक में भारतीय टन-भार लगातार बढ़ रहा है। जून, 2024 तक, 11.95 मिलियन सकल टन-भार (जीटी) के साथ 485 भारतीय-ध्वजांकित जहाज विदेशी व्यापार में संचालित होते हैं। इसके अतिरिक्त, 1.7 मिलियन जीटी वाले 1041 जहाज तटीय व्यापार में लगे हुए हैं। इसके अलावा, भारतीय नियंत्रित टन भार के तहत 45,604 जीटी के 4 जहाजों का अधिग्रहण किया गया है। कुल मिलाकर, 13.7 मिलियन जीटी के साथ 1,530 जहाज भारतीय ध्वज वाले हैं। भारतीय टन-भार में वृद्धि के साथ, विदेशी ध्वज वाले जहाजों की तुलना में भारतीय ध्वज वाले जहाजों के प्रति व्यावसायिक प्राथमिकता में बदलाव आया है।

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यह जानकारी केंद्रीय पत्तन, पोत पहिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

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