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साइलेंट हार्ट अटैक: बिना आवाज़ के आने वाला खतरा, जिसे अक्सर लोग पहचान नहीं पाते

चुपके से वार करता है दिल का दौरा: साइलेंट हार्ट अटैक को पहचानें और बचें!- आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और गलत लाइफस्टाइल ने हमारी सेहत पर बहुत बुरा असर डाला है। काम का टेंशन, उल्टा-सीधा खाना और कसरत की कमी की वजह से मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियां बहुत आम हो गई हैं। पहले लगता था कि हार्ट अटैक सिर्फ बूढ़े लोगों को होता है, पर अब तो ये कम उम्र के लोगों को भी तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। सबसे डरावनी बात ये है कि जहाँ हम आम हार्ट अटैक के बारे में जानते हैं, वहीं साइलेंट हार्ट अटैक के बारे में ज़्यादा लोगों को पता ही नहीं है। इसका सबसे खतरनाक पहलू यही है कि ये बिना किसी खास लक्षण के आता है और मरीज़ को इसका पता ही नहीं चलता। कई बार तो लोग महीनों तक अनजान रहते हैं और बाद में किसी मेडिकल टेस्ट के दौरान पता चलता है कि वे हार्ट अटैक झेल चुके हैं। इसलिए, इस साइलेंट किलर के बारे में जानना और समझना बहुत ज़रूरी है।

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साइलेंट हार्ट अटैक: जब दिल पर पड़े चुपके से चोट- वैसे तो हार्ट अटैक के आम लक्षणों में सीने में ज़ोर का दर्द, पसीना आना, साँस फूलना और चक्कर आना शामिल हैं। लेकिन साइलेंट हार्ट अटैक में ये लक्षण या तो बहुत हल्के होते हैं या फिर बिल्कुल ही दिखाई नहीं देते। इसी वजह से लोग इसे पहचान नहीं पाते। कभी-कभी इसके लक्षण फ्लू या पेट की गड़बड़ी जैसे लग सकते हैं, जैसे अचानक बहुत ज़्यादा थकान महसूस होना, पेट में भारीपन या शरीर के ऊपरी हिस्से में हल्का दर्द। कई मरीज़ों को तो इसका पता तब चलता है जब वे किसी और वजह से डॉक्टर के पास जाते हैं और जाँच में सामने आता है कि दिल की मांसपेशियों को पहले ही नुकसान पहुँच चुका है। लेकिन यह जानना बहुत ज़रूरी है कि इसका असर भी आम हार्ट अटैक जितना ही गंभीर होता है और अगर समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए, इन छुपे हुए लक्षणों को पहचानना बेहद ज़रूरी है।

दिल का दौरा क्यों पड़ता है? वजहें और बचाव- हमारे दिल को ठीक से काम करने के लिए खून और ऑक्सीजन की सख़्त ज़रूरत होती है। जब दिल की रक्त वाहिकाओं, जिन्हें कोरोनरी आर्टरी कहते हैं, में कोई रुकावट या खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) बन जाता है, तो दिल तक खून और ऑक्सीजन पहुँचना बंद हो जाता है। यही स्थिति हार्ट अटैक को जन्म देती है। कुछ मामलों में, नसों में ऐंठन या चोट लगने की वजह से भी खून का बहाव रुक सकता है। यह स्थिति किसी भी समय हो सकती है – चाहे आप आराम कर रहे हों, सो रहे हों, अचानक किसी तनाव में आ गए हों या कोई भारी कसरत कर रहे हों। साइलेंट हार्ट अटैक इसलिए और भी ज़्यादा खतरनाक है क्योंकि मरीज़ को इस बात का अंदाज़ा ही नहीं होता कि उनके दिल को कितना नुकसान पहुँच रहा है। यह एक तरह से चुपके से होने वाली बीमारी है जिसका पता चलना बहुत मुश्किल हो जाता है।

साइलेंट हार्ट अटैक के छुपे हुए संकेत- भले ही इसमें लक्षण बहुत हल्के होते हैं, लेकिन कुछ ऐसे संकेत हैं जिन्हें हमें बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। अक्सर लोग इन संकेतों को मामूली समझकर टाल देते हैं, जो कि बहुत खतरनाक हो सकता है।

* असामान्य थकान: शरीर में बार-बार और बिना किसी खास वजह के बहुत ज़्यादा थकान महसूस होना।
* हल्का दर्द या दबाव: सीने, पीठ या जबड़े में हल्का दर्द या खिंचाव महसूस होना।
* पेट की गड़बड़ी: अपच, गैस या पेट में भारीपन जैसा महसूस होना।
* ऊपरी शरीर में दर्द: हाथों या पीठ के ऊपरी हिस्से में अचानक दर्द उठना।
* अचानक पसीना या चक्कर: बिना किसी कारण अचानक ज़्यादा पसीना आना या चक्कर जैसा महसूस होना।

ये लक्षण आम हार्ट अटैक जितने तेज़ नहीं होते, लेकिन इनके पीछे दिल की कोई गंभीर समस्या छिपी हो सकती है। इसलिए, इन्हें हल्के में लेना जानलेवा साबित हो सकता है।

किसे है ज़्यादा खतरा? पहचानें रिस्क फैक्टर्स- हर किसी को साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा एक जैसा नहीं होता। कुछ खास हेल्थ कंडीशन्स और आदतें इस खतरे को बढ़ा देती हैं। जैसे, जिनका वज़न ज़्यादा है, जो नियमित कसरत नहीं करते, जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है। इसके अलावा, ज़्यादा नमक, तेल या मसालेदार खाना भी दिल पर ज़ोर डालता है। डायबिटीज के मरीज़ों में यह खतरा और भी बढ़ जाता है क्योंकि उन्हें दर्द का एहसास कम होता है और हार्ट अटैक का पता चलने में देर हो जाती है। धूम्रपान करना और लगातार तनाव में रहना भी दिल की सेहत को बुरी तरह बिगाड़ते हैं।

खतरे को समझें और खुद को बचाएं-कुछ ऐसे फैक्टर होते हैं जिन्हें हम बदल नहीं सकते, जैसे परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास होना। 45 साल से ज़्यादा उम्र के पुरुष और 55 साल से ज़्यादा उम्र की महिलाएं ज़्यादा खतरे में होती हैं। खासकर मेनोपॉज के बाद महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को नियमित तौर पर अपनी हेल्थ चेकअप करवानी चाहिए और अपने खान-पान, कसरत और जीवनशैली पर खास ध्यान देना चाहिए। छोटी-छोटी आदतें जैसे धूम्रपान छोड़ना, रोज़ाना थोड़ी देर टहलना और तनाव को कंट्रोल करना दिल की बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। अपनी सेहत का ध्यान रखना सबसे ज़रूरी है।

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